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आधार कार्ड पर देश की सर्वोच्चतम अदालत का ऐतिहासिक फैसला अब नहीं होगा आयु सत्यापन


(संदीप कुमार) SC ने आधार कार्ड को उम्र के प्रमाण पत्र के रूप में मान्यता देने से इनकार किया हैं इस रूप में स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र (SLC) जैसे दस्तावेज अधिक विश्वसनीय हैं आधार एकमात्र भारतीय विशिष्ट पहचाना प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा आधार को सार्वभौमिक पहचाना इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में वर्णित किया गया हैं। इसे केवल पहचान का प्रमाण माना गया हैं उम्र का नहीं इस मामले की पृष्ठभूमि हरियाणा के रोहतक कोर्ट में शिकाराम के दुर्घटना में हुई मौत के चलते मुआवजे की ज्यादा माँग फैक्टर को लेकर हुआ हैं जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे की ज्यादा माँग को मांगा SC ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धारा 94 के अनुसार आयु सत्यापन के लिए शैक्षिक प्रमाणपत्र जैसे दसवीं की मार्कशीट, स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र उपयोग में लाने चाहिए आधार नहीं।
विभिन्न न्यायलयों में उम्र सत्यापन के लिए स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र को मान्यता दी हैं आधार को नहीं। 2018 sc की संविधान पीठ फैसले में आधार को पहचान पत्र माना उम्र का प्रमाणपत्र नहीं ।

आधार कार्ड का जन्म यूपीए सरकार ने यूनिक आईडी के तहत् ग़रीब परिवारों को सरकारी सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया था लेकिन आंतरिक असहमति और राष्ट्रीयता सुरक्षा पर खतरा समझते हुए इसपर असहमति बनी लेकिन फिर 2016 में  तात्कालिक सरकार ने मनी बिल का उपयोग करते हुए इसको पास कर लिया गया था 
इसके बाद 2018 में SC ने पुट्टा स्वामी case में आधार को बैंक खाते, स्कूल में नामांकन या सिमकार्ड के लिए अनिवार्य नहीं किया जा सकता
 लेकिन वर्तमान परिपेक्ष में आधार कार्ड को एक आवश्यक दस्तावेज सरकार के माध्यम से बनाया गया हैं कई निजी कंपनी में भी ये आवश्यक दस्तावेज के रूप में स्वीकार्य हैं जैसे मनरेगा, आदित्या बिरला ग्रुप आदि

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